बडेरचाल (old age life)

देसी रंग
———-
【बडेरचार】
थार के संयुक्त परिवारों में सत्ता एक ही जगह केंद्रित होती है… घर परिवार, गाम ग़ायन्तरा, ब्याह एडो से लेकर घर की नान्ह चून(miscellaneous) तक सारी चीज सिर्फ एक ही आदमी निर्धारित करता है… वो प्रायःकर घर का सबसे वरिष्ठ सदस्य होता है परंतु कभी कभार ज्यादा अनुभव और योग्यता रखने वाला कोई कनिष्ठ भी घर का कार्यभार संभाल सकता है… घर का पत्ता पत्ता अपने नियंत्रण में रख घर को चलाने वाला यह सदस्य बडेरा(मुखिया) कहलाता है… थार के मुखिया धोती पहनते हैं तथा तिरछी काट वाली घर पर सिली हुई गिंजी(vest) होती है जिसके बिल्कुल बीचोंबीच एक अंडरग्राउंड जेब होती है जिसका मुख नाभि से थोड़ा सा ऊपर होता है… थार के बड़ेरे की यह मोबाइल तिजोरी होती है जिसके भीतर क्या क्या खजाने छुपे हुए होते हैं यह धणी के अलावा कोई नहीं जानता…. घर के किसी भी सदस्य को एक भी पैसा चाहिए हो तो बडेरे व्यक्ति के पास सर झुका कर तब तक खड़े रहना होता है जबतक बडेरा खुद प्रायोजन पूछ न ले… उसके बाद डिमांड की गई राशि की ऑन स्पॉट स्क्रूटिनी होती है… अर्थात पूछताछ कर तय किया जाता है कि मांग की गई रकम सही और जायज है… उसके पश्चात बडेरे का हाथ रहस्यमयी ढंग से गिंजी की उस जेब में कहीं खो जाता है… और जबतक हाथ बाहर आता है तबतक धणी दूसरी तरफ घूम चुका होता है जिसकी वजह से मांगने वाले को सिर्फ वही दिखता है जो उसने डिमांड की होती है…

बडेरे आदमी के सुबह नहा धोकर कपड़े पहनने के अंदाज से घर के सारे लोग कयास लगा लेते हैं कि आज उन्हें कहीं बाहर जाना है या नहीं… हाथ में सख्त मैटी का झोला उठाकर उनके बाहर निकलने और गांव की गलियों में पों पों करती बस के स्वर के धुंधले पड़ने के साथ ही घर के बच्चे बाकी घरवालों को हैरान करते हुए घर को सर पर उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते… यह सब तबतक चलता रहता है जबतक वही बस पों पों करती हुई गांव की गलियों में अपनी संध्याकालीन वापसी का ऐलान करती है… बडेरे का घर में प्रवेश होते ही घर में बिना किसी यत्न के शांति बहाली हो जाती है…

थार का बडेरा आवश्यकरूप से अतिरिक्त गम्भीर होता है… उसकी आवाज कम निकलती है और जब भी निकलती है कड़क निकलती है… सुबह लेट तक सोने वाले लोगों पर बडेरे की नजर पड़ना कहर बरपाती है… घर, खेत, पशुबाड़ा, और आंगन…. सबका औचक निरीक्षण उनके द्वारा किया जाता है तथा किसी भी तरह की ढील या झोल होने पर ऐसी लताड़ लगाई जाती है कि सामने वाला जिंदगी भर याद रखता है….

थार का बडेरा समझदार, भावात्मकरूप से मजबूत और अत्यंत witty होता है… किसी भी तरह के सवाल जवाब की स्थिति में उनके चेहरे का कॉन्फिडेंस सामने वाले को गर्दन झुकाकर जमीन खुरचने पर मजबूर कर देता है… और तर्क और वितर्क के बाद उसकी कही बात प्रायकर सच साबित होती है…

बडेरे का रेसिडेंस् तिबारी(parlour) में होता है… एक बड़े से चौक पर दो या तीन द्वार का एक कमरा होता है जिसे तिबारी कहते हैं… सामान्यतः बडेरे की चौकी पर सुलगते हुए हुक्के या चिलम के चारों और आठ दस बडेरे आदमी बैठे हथाई के हिलोरें उठाते हैं… उनके आगमन पर बडेरे की कड़क आवाज अंदर किसी जरूरी काम में व्यस्त घरवालों को सतर्क कर देती है और मांगी गई चीजों तुरंत चौकी पर पहुंच जाती है… औचक निरीक्षण के अलावा बडेरा व्यक्ति अपनी तिबारी छोड़कर घर के बाकी हिस्सों में कम ही जाता है… उसका भोजन पानी और चिलम तम्बाकू सबकी व्यवस्था तिबारी में ही हो जाती है…

बड़े हो या छोटे… घर का हर फैसला बडेरे के हाथ में होता है तथा अपनी किसी भी योजना या निर्णय की जानकारी देना वह कत्तई जरूरी नहीं समझता… घर के बाकी सदस्यों को उतना ही पता होता है जितना काम उन्हें ओढ़ाया(सौंपा) होता है…

ऐसी बात नहीं है कि बडेरा हमेशा उग्र और कठोर ही होता है… किसी सदस्य के बीमार होने, छोटे बच्चों का ख्याल रखने, घर के आंतरिक मतभेदों को fairly हल करने, जरूरत के सामान की पूर्ति करने और हरेक भावात्मक break down में परिवार के साथ खड़े रहने के कारण वह घर का लोकप्रिय सदस्य भी होता है…

उपरोक्त बातों के अलावा हजारों ऐसी बातें है जो बडेरे को अपना घर चलाने की असीम शक्तियां प्रदान करती है जिसे जानकर अगर आपको वह आदमी तानाशाह लग रहा है तो आप समझे ही नहीं…. !!

दरअसल यह परम्परा और अनुशासन का ऐसा अनूठा मिश्रण है जिसकी महत्ता घर के हर सदस्य को मालुम होती है… इसकी बड़ी वजह यह है कि इस व्यवस्था के खिलाफ जाने वाले परिवारों का टूट जाते हैं और क्राइसिस में आ जाते हैं…. और इसी वजह से घर का हरेक सदस्य willingly बडेरे का आधिपत्य अपने घर में स्वीकार करता है… उसके निर्णयों और आदेशों में हमेशा एक लॉजिक होता है जिसका आभास घर के हर सदस्य को रहता है…

Leave a Comment